बिग बेंग सिद्धांत Big Bang Theory in Hindi

Big Bang Theory in Hindi

हम जो आज हमारे चारो ओर जो पेड़-पौधे देख रहे है वो कई सालो पहले एक घटना के कारण इन सब का निर्माण हुआ है जिसे बिग बेंग Big Bang नाम से जाना जाता है। यह घटना 13 अरब साल पहले हुआ था। उस वक्त समय को 0 (ज़ीरो) माना गया है अर्थात समय का निर्माण भी नहीं हुआ।
सबसे पहले जब दुनिया नहीं बनी थी तब सब कुछ एक बिन्दु पर था, हमारी पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा, तारे यहा तक की अन्तरिक्ष भी। बिग बेंग के बाद ही अन्तरिक्ष का भी निर्माण हुआ है। अचानक वह बिन्दु बड़ा होने लगा मतलब उस बिन्दु का विस्तार होने लगा जो बहुत तेजी से हो रहा था। यहा विस्तार कभी रुकने वाला नहीं था जो आज भी हो रहा है। बिंग बेंग से पहले कुछ भी नहीं था न आगे न ही पीछे, न ही ऊपर, नहीं ही नीचे अर्थात कुछ भी नहीं था। सारा ब्रह्मांड एक बिन्दु की शक्ल में था। यह बिन्दु अत्यधिक घनत्व(infinite density) का, अत्यंत छोटा बिन्दु(infinitesimally small ) था। ब्रह्मांड का यह बिन्दु रूप अपने अत्यधिक घनत्व के कारण अत्यंत गर्म(infinitely hot)रहा होगा। इस स्थिती में भौतिकी, गणित या विज्ञान का कोई भी नियम काम नहीं करता है। यह वह स्थिती है जब मनुष्य किसी भी प्रकार अनुमान या विश्लेषण करने में असमर्थ है। काल या समय भी इस स्थिती में रुक जाता है, दूसरे शब्दों में काल और समय के कोई मायने नहीं रहते है। एक महा विस्फोट के साथ ब्रह्मांड का जन्म हुआ और ब्रह्मांड में पदार्थ ने एक दूसरे से दूर जाना शुरू कर दिया।

महा विस्फोट के लगभग 10-43 सेकंड के बाद फोटोन के रूप मे ऊर्जा का निर्माण हुआ व इसी के साथ इलेक्ट्रॉन, प्रोटोन जैसे कणो का निर्माण हुआ। इसके बाद मात्र कुछ समय मे इन कणो के आपस मे टकराव के कारण उनके प्रति कणो का निर्माण होने लगा एवं कुछ तो एक दूसरे से टकराकर खत्म हो गए।
अब 1 सेकंड बाद तापमान लगभग 10 अरब डिग्री सेल्सियस था और ब्राम्हांड ने उस समय आकार लेना शुरू कर लिया था। प्रोटोन, न्यूट्रोन ने मिलकर तत्वो elements का केंद्र बनाया जैसे हाइड्रोजन, हीलियम इत्यादि।
जब महा विस्फोट के बाद तीन मिनट बीत चुके थे, तापमान गिरकर 1 अरब डिग्री सेल्सीयस हो चुका था, तत्व और ब्रह्मांडीय विकिरण(cosmic radiation) का निर्माण हो चुका था। यह विकिरण आज भी मौजूद है और इसे महसूस किया जा सकता है।

300,000 वर्ष के पश्चात, विस्तार करता हुआ ब्रह्मांड अभी भी आज के ब्रह्मांड से मेल नहीं खाता था। तत्व और विकिरण एक दूसरे से अलग होना शुरू हो चुके थे। इसी समय इलेक्ट्रान , केन्द्रक के साथ में मिल कर परमाणु का निर्माण कर रहे थे। परमाणु मिलकर अणु बना रहे थे।
1 अरब वर्ष पश्चात, ब्रह्मांड का एक निश्चित सा आकार बनना शुरू हुआ था। इसी समय क्वासर, प्रोटोगैलेक्सी(आकाशगंगा का प्रारंभिक रूप), तारों का जन्म होने लगा था। तारे हायड्रोजन जलाकर भारी तत्वों का निर्माण कर रहे थे।
आज महा विस्फोट के लगभग 14 अरब साल पश्चात की स्थिती देखे ! तारों के साथ उनका सौर मंडल बन चुका है। परमाणु मिलकर कठिन अणु बना चुके है। जिसमे कुछ कठिन अणु जीवन( उदा: Amino Acid) के मूलभूत कण है। यही नहीं काफी सारे तारे मर कर श्याम विवर(black hole) बन चुके है।

ब्रह्मांड का अभी भी विस्तार हो रहा है, और विस्तार की गति बढ़ती जा रही है। विस्तार होते हुये ब्रह्मांड की तुलना आप एक गुब्बारे से कर सकते है, जिस तरह गुब्बारे को फुलाने पर उसकी सतह पर स्थित बिन्दु एक दूसरे से दूर होते जाते है उसी तरह आकाशगंगाये एक दूसरे से दूर जा रही है। यह विस्तार कुछ इस तरह से हो रहा है जिसका कोई केन्द्र नहीं है, हर आकाश गंगा दूसरी आकाशगंगा से दूर जा रही है। इस तरह हमारी पृथ्वी जैसे ग्रहो एवं इस संसार का निर्माण हुआ।

3 Comments

  1. Pavan Patel 1 September, 2017
  2. Manju 10 September, 2017
    • Mukesh Patel 15 September, 2017

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